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भारत शासन अधिनियम 1935

 

भारत शासन अधिनियम 1935

भारत शासन अधिनियम 1935

अंग्रेजी शासन के दौरान 1861 ई० में प्रारम्‍भ हुई संवैधानिक विकास की प्रकिृया का अन्तिम चरण भारत सरकार अधिनियम 1935 को माना जाता हहै। 1935 का अधिनियम ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत पर शासन कायम रखने का अन्तिम प्रयास था, जिसकी प्रमुख विशेषताएं निम्‍न‍लिखित थी-

- प्रान्‍तों में द्वैध-शासन की समाप्ति कर उन्‍हें स्‍वतन्‍त्र बनाया गया, जबकि केन्‍द्र में द्वैध-शासन की स्‍थापना की गयी।

समस्‍त विषय को तीन सूचियों में विभाजित किया गया-

1. केन्‍द्रीय सूची     – 59

2. राज्‍य सूची      – 54

3. समवर्ती सूची    – 36

केन्‍द्रीय विषयों को दो भागों में बांटा गया-

1. सुरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर जनरल को कार्यकारी पार्षदों की सलाह पर करना था, जो केन्‍द्रीय व्‍यवस्‍थापिका के प्रति उत्‍तरदायी नहीं थे। जैसे- विदेशी मामले, जनजातीय क्षेत्र, धार्मिक एवं रक्षा मामले आदि

2. हस्‍तान्‍तरित इन विषयों का प्रशासन गर्वनर जनरल को उन मन्त्रियों की सलाह पर करना था, जो केन्‍द्रीय व्‍यवस्‍थापिका के प्रति उत्‍तरदायी थे।

- सभी ब्रिटिश भारतीय प्रान्‍तों एवं मुख्‍य आयुक्‍त कके प्रान्‍तों को मिलाकर एक संघ के निर्माण का प्रस्‍ताव रखा गया, जिसमें देशी रियासतों का सम्मिलित होना वैकल्पिक था।

- भारत में एक संघीय बैंक (रिजर्व बैंक, 1935) तथा संघीय न्‍यायालय (Federal Court, 1937) की स्‍थापना की गयी।

- भारत परिषद का अन्‍त कर दिया गया, परन्‍तु ब्रिटिश संसद की सर्वोच्‍चता बनी रही।

- बर्मा, बरार एवं अदन को भारत से प्रथक किया गया।

कैबिनेट मिशन 1946

भारत में चल रहे राजनीतिक गतिरोध को समाप्‍त करने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्‍लीमेण्‍ट एटली ने फरवरी, 1946 में एक तीन सदस्‍यीय शिष्‍टमण्‍डल भेजने की घोषणा की। इसके सदस्‍य-लार्ड पैथिंक लारेन्‍स (भारत सचिव), सर स्‍टैफोड क्रिप्‍स (व्‍यापार बोर्ड के अध्‍यक्ष), तथा ए०वी० अलेक्‍जेण्‍डर (नौसेना मंत्री) थे।

कैबिनेट मिशन की प्रमुख शिफारिशें निम्‍न थी-

- ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों को सम्मिलित कर एक भारतीय संघ का गठन किया जायेगा। संघ के अधिकार में केवल तीन विभाग विदेश, रक्षा और संचार होगें। अन्‍य सभी विषय एवं अवशिष्‍ट शक्तियां प्रान्‍तों में निहित होगी।

- भारत के सभी दलों के सहयोग एवं प्रयास से एक अन्‍तरिम सरकार का गठन किया जाएगा, जिसके सभी विभाग भारतीयों के नियन्‍त्रण में रहेगें।

- भारतीयों द्वारा संविधान निर्माण के लिए एक संविधान का गठन किया जाएगा, जिसमें 10 लाख रू की जनसंख्‍या पर एक प्रतिनिधि का चुनाव किया जाएगा।

अन्‍तरिम सरकार (1946)

- अन्‍तरिम सरकार के सदस्‍य वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्‍य थे। वायसराय परिषद का प्रमुख बना रहा, जवाहरलाल नेहरू को इसका उपाध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया था।

सदस्‍य

सम्‍बद्ध विभाग

जवाहरलाल नेहरू

राष्‍ट्रमण्‍डल एवं विदेशी मामले

सरदार वल्‍लभ भाई पटेल

गृह, सूचना एवं प्रसारण

डा० राजेन्‍द्र प्रसाद

खाद्य एवं कृषि

जॉन मथाई

उद्योग एवं नागरिक आपूर्ति

जगजीवन राम

श्रम

सरदार बलदेव सिंह

रक्षा

सी०एच० भाभा

कार्य, खान एवं ऊर्जा

आसफ अली

रेलवे एवं परिवहन

सी० राजगोपालाचारी

शिक्षा एवं कला

लियाकत अली खां

वित्‍त

अब्‍दुल रब नश्‍तर

संचार

आई० आई० चुदंरीगर

वाणिज्‍य

गजनफर अली खान

स्‍वास्‍थ्‍य

जोगेन्‍द्र नाथ मण्‍डल

विधि

- 1935 के अधिनियम में पहली बार एक परिसंघ की स्‍थापना की बात कही गयी थी, किन्‍तु देशी रियासतों की असहम‍ति के कारण परिसंघ की योजना पूरी न हो सकी।

- वर्तमान में राष्‍ट्रपति के अध्‍यादेश जारी करने का अधिकार 1935 के भारत शासन अधिनियम से प्रेरित है।

- पृथक्‍कतावाद का बीजारोपण वर्ष 1909 के मार्ले-मिण्‍टो सुधारों की घोषणा से हुआ।

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